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Showing posts from September, 2022

मौन कौन

             पहाड़ो का कुछ समझ नही आता?  कभी खुद खड़े हो जाते नदी का रास्ता रोके, कभी खुद ही बह जाते , नदी में खुद को खोके। नदियों का कुछ समझ नही आता ? कभी रह जाती है , पहाड़ो के बंधन में, कभी बहा ले जाती, बंधन को अपने संग में। एक बनाता बंधन, दूसरा उसे तोड़ जाता, तोड़ कर न जाने क्यों फिर नए बंधन में बंध जाता। नए दायरे परस्पर बनाते रहते, ये दोनु एक दूजे लिए, संग रहना भी चाहते, संग बहना भी चाहते, ये  दोनु एक दूजे के लिए। पहाड़ क्यों रहते मौन?  नदियां रहती क्यों शांत? क्यों बर्बाद करते हम प्रकृति का एकांत? क्यों पहाड़ो को काटकर , रास्ते हम बना रहे? क्यों नदियों के राहों पर,  हम अपना आशियाना बना रहे ? जब नदिया सीखा देगी ,पहाड़ो को चलना, तब समझ आएगा हमे क्या होता है छलना, कब तक रहती नदी शांत और पहाड़ मौन, अब कौन रहेगा उन घरों में, उन राहों में चलेगा कौन?

एक सपना लिये उड़ चले है हम।

  कई सपनों को पूरा करने, एक सपना लिये उड़ चले है हम। अंधकार को हराकर,  रोशनी को जीतने चले हम। ख्वाइशें है अनेको की, अब कई दिलो की धड़कन है हम। हमसे बंधी है, उम्मीदें न जाने कितनों की, अब उनकी उम्मीदों के लिए अपनी ही उम्मीदों लड़ चले हम। वक़्त ने बदल दी राहे सबकी, बहके कभी, समझे कभी, रुक का थोड़ा आगे बढ़ चले हम। जिन राहो में खोए है हम, उन्ही में उड़ना चाहते है हम,  छूना चाहते है नील गगन, जैसे छूती है कागज़ की पतंग डोर का नही  है कोई बंधन, बस उड़ना चाहते है स्वछंद। उड़ रहे लेकर भीतर कई द्वंद, जीतेंगे ये अनकही जंग। कई सपनों को पूरा करने, एक सपना लिये उड़ चले है हम।

तुम होती हम हम रह जाते।

  कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते, तु खुलकर कहती बातें अपनी  और वो बाते स्वीकार मुझे होते। कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते, तु जीती जिंदगी अपनी और हम तुम अलग होकर  साथ होते। कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते, तुम कह पाती सच्ची बाते और हम-तुम मुस्कुराकर जीते होते। कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते, तुम सिर्फ सोचती अपने बारे में और हम जिंदगी होते। कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते, अनकहे फ़ासले न होते और हम तुम सच मे साथ होते। कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते, विचार कुछ तेरे भी होते औऱ चिंतन हमारे होते। कितना अलग होता अगर हम अलग होते, न तुम अधूरी  होती और हम तुम पूरे होते। कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते, समाज से न बंधे होते, सिर्फ प्रेम के बंधन से बंधे होते। जहा होता प्रेम है वहा बंधन बंध जाते , जहा होता बंधन है वहा समाज बन जाते , जहा होता समाज है , वहा सम्मान सवाल बन जाते, जहा होता सवाल सम्मान का है, वह प्रेम अक्सर खो जाते। कितना अलग होता अगर  प्रेम समाज से ऊपर हो जाते, तुम केवल तुम होती हम हम रह जाते।  कितना अलग होता  अगर हम अलग होते, न त...

न हुई हो।

कुछ लिखने को शब्द जब न मिल रहे हो, तो लगता है, आज खुद से बात न हुई हो। बादलो से ढका हो पूरा आसमाँ, तो लगता है, धरती की आसमां से मुलाकात न हुई हो।              लव-वन  

ये क्या किए जा रहा हूं मै???

      आंखें हैं, अच्छाई देख जिए जा रहा हूं मैं,       बुरा हूं, आँखें मूंदे गलतियां किए जा रहा हूं मैं।      जुबान है, सच्चाई बोलने के लिए जा रहा हूं मैं,      बुरा हूं, सच्ची बातों में जहर घोले जा रहा हूं मैं।      कर्ण है, सच्चाई सुनने के लिए जिए जा रहा हूं मैं,      बुरा हूं, झूठ सुन नफरत को पाले जा रहा हूं मैं।     तन है, सच्चे कर्मो के लिए जिए जा रहा हूं मैं,     बुरा हूं, कर्म के फलों के चिंता किए जा रहा हूं मैं।     मन है, शुद्ध विचारों संग जिए जा रहा हूं मैं,     बुरा हूं, स्वार्थी विचारों से घिरे जा रहा हूं मैं।    हृदय है, सबसे प्रेम किए जिए रहा हूं मैं,    बुरा हूं, कुरुरता का बीज बोए जा रहा हूं मैं।    लहू है, लहू दान किए जिए जा रहा हूं मैं,    बुरा हूं, लहू को रंगो में बाटे जा रह...

एक साथ

  मानव शरीर अब रेडियो चैनल सा लग रहा , तापमान कहो या चैनल 98.5 से 102.5 तक पकड़ रहा, न बादशाह न हनी सिंह, याद आ रहे जगजीत सिंह। केवल केवल विविध भारती सुनाई दे रहे गुलशन की शिव आरती। मोहमद रफ़ी और किशोर दा गा रहे, राजेश और यूसुफ गीत जिंदगी का गुनगुना रहे। सरगम और साज सुनाई दे रहे एक साथ। अब न करें कोई हमसे  #मनकीबात वरना सत्ता परिवर्तन के लिए, उठेगी आवाज़, उठेंगे अनगनित हाथ। एक साथ, एक साथ, एक साथ।

फ़िक्र जिक्र

  तुमने सुनीं हैं वो बातें कहीं, जो खामोशियों से थी मैंने कही, दिल ये में फिर धड़कने लगा, जब मैं तुम्हें दिल से समझने लगा। तुम्हे मेरी जरा सी भी फिक्र न थी, और मैं सारे जहां से तुम्हारा जिक्र करता रह गया।

मत होना

  पहाड़ी होना पर पहाड़ मत होना, जंगल होना पर उजाड़ मत होना। किताब होना पर कबाड़ मत होना, बरगद होना पर खजूर का झाड़ मत होना। ~Luvone

तस्वीर ताबीर

  उम्र के  तकाजे पर इतना रहा जिंदगी के  तजुर्बे का असर कि तस्वीर मेरी, पल पल बदलती रही, और तासीर तेरा इतना रहा मेरी तकदीर पर, कि तेरी तख्लीख से मेरी ताबीर बदलती रही। ~luvone

क्या हो गया हूं मैं?

  धुंधला धुंधला सा हो गया हूं मैं, अनजानी राहो में कहीं  खो सा गया हूं मैं,  किसी एक उलझन में ठहर सा गया हूं मैं, नई किताब के असर सा हो गया हूं मैं। क्या से  क्या हो गया हूं मैं? जवाब नही, सवाल हो गया हूं मैं, सुना गया, अनसुना दास्तां हो गया हूं मैं, हकीकत नही, ख्वाब हो गया हूं मैं, पास नही, खुद से दूर हो गया हूं मैं। ये  क्या हो गया हूं मैं? मंजिल नहीं, फिर सफर हो गया हूं मैं, नर्म नही, कठोर हो गया हूं मैं, इंसान नही, धर्म हो गया हूं मैं, खून नही, पानी हो गया हूं मैं, क्या से  क्या हो गया हूं मैं? प्रकाश नहीं, अंधकार हो गया हूं मैं, दिन नही, अब रात हो गया हूं  मैं, कल नही, काल हो गया हूं मैं, इतिहास नहीं,  बवाल हो गया हूं मैं, ये क्या हो गया हूं मैं? प्रेम नहीं, अहंकार हो गया हूं मैं, जीत के लिए पहला प्रहार हो गया हूं मैं, हल नहीं, छल हो गया हूं मैं, बुद्धिमान नहीं, बेअकल हो गया हूं मैं, क्या से क्या हो गया हूं मैं? हम नही, मै-मैं  हो गया हूं मैं, भाव नही, जज्बात हो गया हूं मैं, साथ नही, अकेला हो गया हूं मैं, साफ नहीं, मैला हो गया हूं मैं, न...

तुमसे दूर जाने के बाद

  वक्त ने वक्त पर न जाने कैसा किया सितम, वक्त वक्त से और वक्त से हार गए हम, तुमसे दूर जाने के बाद। न जाने सुकून मिलेगा, या बढ़ जाएगी बैचैनी, याद तुम आओगे,या याद आएंगे वों मीठे पलों की तनातनी, तुमसे दूर जाने के बाद। जीत गए अगर वक्त से लेकिन साथ तुम ना हो, तो वो वक्त ही किस बात का,जब हम हम न हो,  तुमसे दूर जाने के बाद। ~Luvone :2June22

वों पिता है हमे जीवन जीना सिखाता है

  तुम आओ इस दुनिया में उससे पहले, वो तुम्हारे लिए कई सपने संजो जाता है, डर डर कर उठाता है पहली बार तुम्हे, अगले ही पल खुशी में तुम्हे आसमान में उछाल जाता है, वो एक इंसान है, पहली बार एहसास पिता का पाता है। बचपन में जिन खिलौने से खेल न पाया वो, तुम्हारे लिए वही खिलौने लेकर आता है, देख खेलते तुम्हे उनसे खुद भी खिल - खिला जाता है, पहला कदम तुम्हारा बढ़ता देख वो, गले से लगकर अपने आंसू छलका जाता है, वो एक इंसान है, बस धर्म पिता का निभाता है। वो मंजिल नही केवल राह बताता है, बढ़ो तुम आगे वो पीछे से हौसला बढ़ाता है, अडिग रहो तुम वो कठिनाइयों से लड़ना सिखाता है, तभी तो अपने प्रेम में वो भय दर्शाता है, वो भी एक इंसान है, बस धर्म पिता का निभाता है। तुम्हारी हर तरीकी पर, कंधो पर तुम्हारे खामोशी से हाथ रख जाता है, नाज है, उसे तुम्हारे फैसलों पर, खुश भी है लेकिन वों, फिर भी नही बताता है, वो भी एक इंसान है, बस धर्म पिता का निभाता है। फासले करने है तय कई तुम्हे, वो अपनी भारी आवाज में पल पल याद दिलाता है, फैसले लेने बड़े बड़े कई तुम्हे वो पीठ तुम्हारी थप थपा जाता है, वो एक इंसान है, बस धर्म पित...

इंतजार

  इंतजार में हम बैठे थे, उनके इंतजार में, ताकि उनसे मिलने पर कुछ काम की बातें हो, और हमें कुछ काम मिले। बातें कर खुद से उनके इंतजार में मालूम हुआ हमें कि उनका इंतजार करना  भी तो सबसे बड़ा काम है। ~luvone