तुम होती हम हम रह जाते।
कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते,
तु खुलकर कहती बातें अपनी और वो बाते स्वीकार मुझे होते।
कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते,
तु जीती जिंदगी अपनी और हम तुम अलग होकर साथ होते।
कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते,
तुम कह पाती सच्ची बाते और हम-तुम मुस्कुराकर जीते होते।
कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते,
तुम सिर्फ सोचती अपने बारे में और हम जिंदगी होते।
कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते,
अनकहे फ़ासले न होते और हम तुम सच मे साथ होते।
कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते,
विचार कुछ तेरे भी होते औऱ चिंतन हमारे होते।
कितना अलग होता अगर हम अलग होते,
न तुम अधूरी होती और हम तुम पूरे होते।
कितना अलग होता अगर हम तुम अलग होते,
समाज से न बंधे होते, सिर्फ प्रेम के बंधन से बंधे होते।
जहा होता प्रेम है वहा बंधन बंध जाते ,
जहा होता बंधन है वहा समाज बन जाते ,
जहा होता समाज है , वहा सम्मान सवाल बन जाते,
जहा होता सवाल सम्मान का है, वह प्रेम अक्सर खो जाते।
कितना अलग होता अगर प्रेम समाज से ऊपर हो जाते,
तुम केवल तुम होती हम हम रह जाते।
कितना अलग होता
अगर हम अलग होते,
न तुम अधूरी होती
और हम तुम पूरे होते।
समाज से न बंधे होते,
सिर्फ प्रेम के बंधन से बंधे होते।
जहा होता प्रेम है
वहा बंधन बंध जाते ,
जहा होता बंधन है
वहा समाज बन जाते ,
जहा होता समाज है ,
वहा सम्मान सवाल बन जाते,
जहा होता सवाल सम्मान का है,
वहा प्रेम अक्सर खो जाते।
कितना अलग होता
अगर प्रेम समाज से ऊपर हो जाते,
तुम केवल तुम होती
हम हम रह जाते।
लव-वन
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