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Showing posts from July, 2021

अलग होते हम तुम

कितना अलग होता  अगर हम तुम अलग होते, तु खुलकर कहती बातें अपनी   और वो बाते स्वीकार मुझे होते  तु जीती जिंदगी अपनी  और हम तुम अलग होकर भी  साथ होते। कितना अलग होता  अगर हम तुम अलग होते, तुम कह पाती सच्ची बाते  और हम-तुम मुस्कुराकर जीते होते। तुम सिर्फ सोचती अपने बारे में  और हम एक जिंदगी होते। कितना अलग होता  अगर हम तुम अलग होते, अनकहे फ़ासले न होते  और हम तुम सच मे साथ होते। विचार कुछ तेरे भी होते  औऱ चिंतन हमारे होते। कितना अलग होता  अगर हम अलग होते, न तुम अधूरी  होती  और हम तुम पूरे होते। समाज से न बंधे होते,  सिर्फ प्रेम के बंधन से बंधे होते। जहा होता प्रेम है  वहा बंधन बंध जाते , जहा होता बंधन है  वहा समाज बन जाते , जहा होता समाज है ,  वहा सम्मान सवाल बन जाते, जहा होता सवाल सम्मान का है, वहा प्रेम अक्सर खो जाते। कितना अलग होता  अगर  प्रेम समाज से ऊपर हो जाते, तुम केवल तुम होती  हम हम रह जाते। लव-वन

क्योंकि दिखना है, है दिखाना भी,

 आज-कल काम कम, कॉले ज्यादा हो रही है। नई तस्वीरों संग,पुरानी तस्वीरे भी साझा हो रही । काम करना क्या है? मालूम नही किसी को, इसलिए सोशल मीडिया पर कल्पनाएं साझा हो रही । बदल कौन रहा? कौन जाने? इंसानियत भी अब अनजानी हो रही । बदलाव क्या होता है? कौन माने? बस बदलाव की  झूठी कहानिया साझा हो रही। सच है क्या?  झूठो की प्रशंसा अब सच्ची हो रही, झूठ है क्या? सच्चो की जुबां खामोश हो रही। झूठ बदल रहा, बदल रहा सच भी, कल्पनाएं बदल रही, बदल रही हकीकत भी इंसान बदल रहा, बदल रही इंसानियत भी। क्योंकि दिखना है, है दिखाना भी, हम ऑफलाइन खुश है, और खुश है डिजिटल दुनिया मे भी। लव-वन

ॐ और मैं

 ॐ में मैं शून्य हूं, शून्य होकर भी अमूल्य हूं। बस मैं तेरा हूं, और तुझमें मैं ही हूं। बहती नदी की भक्ति हूं, मैं ही निश्चल शक्ति हूं। मैं ही शिव हूं, न ही मैं भूत हूं, न ही मै भविष्य हूं, बस मै ही वर्तमान हूं!  मैं ही शंभू हूं, मैं ही ॐ कार हूं। बोलो जय  भोले नाथ। जय मां गंगे।

न मानने वाला हूँ

 न कोई सुनने वाला है, न ही कोई समझ्ने वाला है। ये दुनिया है ही ऐसी, हर कोई ख़ंजर घोपने वाला है। घोंपे तो खंजर हमने भी कही, मै खुद भी न मानने वाला हूँ । #स्वचिंतन  #मैंहूँन #अंत  लव वन

क़रीब पराये या पैसा

 यह जिंदगी अजीब सी क्यों है, अपने होते हुए भी , पराये करीब से क्यों है??? क्या रोटी ही पैसा है, या,  पैसा ही रोटी है, ये,  रोटी इतनी अनोखी सी क्यों हैं???  लव_वन

तो लगता है

 कुछ लिखने को शब्द जब न मिल रहे हो, तो लगता है, आज खुद से बात न हुई हो। बादलो से ढका हो पूरा आसमाँ, तो लगता है, धरती की आसमां से मुलाकात न हुई हो।                                                       लव-वन

ये क्या किये जा रहा हूँ मैं?

 ये क्या किए जा रहा हूं मै???       आंखें हैं, अच्छाई देख जिए जा रहा हूं मैं,       बुरा हूं, आँखें मूंदे गलतियां किए जा रहा हूं मैं।      जुबान है, सच्चाई बोलने के लिए जा रहा हूं मैं,      बुरा हूं, सच्ची बातों में जहर घोले जा रहा हूं मैं।      कर्ण है, सच्चाई सुनने के लिए जिए जा रहा हूं मैं,      बुरा हूं, झूठी नफरत पाले जा रहा हूं मैं।     तन है, सच्चे कर्मो के लिए जिए जा रहा हूं मैं,     बुरा हूं, कर्म के फलों के चिंता किए जा रहा हूं मैं।     मन है, शुद्ध विचारों संग जिए जा रहा हूं मैं,     बुरा हूं, स्वार्थी विचारों से घिरे जा रहा हूं मैं।    हृदय है, सबसे प्रेम किए जिए रहा हूं मैं,    बुरा हूं, कुरुरता का बीज बोए जा रहा हूं मैं।    लहू है, लहू दान किए जिए जा रहा हूं मैं,    बुरा हूं, लहू को रंगो में बाटे जा रहा हूं मैं।    अच्छाई की चादर ओढ़े, जिए जा रहा हूं मैं,    बुरा हूं, बुरा ही किए ज...