ॐ और मैं
ॐ में मैं शून्य हूं,
शून्य होकर भी अमूल्य हूं।
बस मैं तेरा हूं,
और तुझमें मैं ही हूं।
बहती नदी की भक्ति हूं,
मैं ही निश्चल शक्ति हूं।
मैं ही शिव हूं,
न ही मैं भूत हूं,
न ही मै भविष्य हूं,
बस मै ही वर्तमान हूं!
मैं ही शंभू हूं,
मैं ही ॐ कार हूं।
बोलो जय भोले नाथ।
जय मां गंगे।
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