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बदलाव की पुकार: 2025 की ओर एक नज़र और मेरी समझ

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  Change the script 2025 सही मायनों में इसका अर्थ वही गहराई से समझ आया – बदलाव की पुकार। वह बदलाव जिसे हम देखना चाहते हैं , लेकिन उस बदलाव की राह में कुछ लोग पीछे छूट जाते हैं। सवाल यही है – पीछे कौन छूट रहा है ? क्या यह सिस्टम की वजह से है या उन चुनौतियों की वजह से जिन्हें हम लगातार नज़रअंदाज़ करते आ रहे हैं ? युवाओं की कहानियों से निकले नैरेटिव:-   युवाओं की कहानियों से ऐसे नैरेटिव सामने आए जिन्हें हमें पूरी तरह से समझना , सोचना और दोबारा बुनना होगा। क्योंकि इन्हीं नैरेटिव्स की वजह से कई लोग पीछे रह जाते हैं। कुछ नैरेटिव्स मेरे मन में लगातार गूंजते रहे: देर से पहुँचने पर मेरे बारे में क्या जजमेंट बनेगा ? अंग्रेज़ी न जानना क्या मेरे करियर को असफल बना देगा ? अलग होना दूसरों से मेरे लिए क्या चुनौतियाँ और विपत्तियाँ लेकर आता है ? औसत होना क्या एक विशेषाधिकार है या एक कठिनाई ? धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक होना , एक thriving life जीने में मेरे लिए कितनी मुश्किलें पैदा कर सकता है ? परीक्षा का होना किस आधार पर तय है , और यह मे...

मैं हूँ...(I am From)

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मैं हूँ अधूरी बातों से जिन्हें सुने बिना, मुझे गुनाहगार बता दिया। मैं हूँ टूटे ख्वाबों से जिन्हें फिर भी मैं बुनता चला गया। मैं हूँ उलझे विचारों से जिन्होंने मुझे कविताओं में ढाल दिया। मैं हूँ मेरे अपनों से जिन्होंने दर्द में भी मुझे हँसना सिखा दिया। मैं हूँ अपने जिगरी यारों से जिन्होंने हारी हुई लड़ाई भरोसे से जीता दिया। मैं हूँ तेरी मोहब्बत से जिसने नफ़रत भुला दिया। मैं हूँ तेरी शख़्सियत से जिसने सिर उठाना सिखा दिया। मैं हूँ हक़ की लड़ाई से कुछ अनुभव से, कुछ पढ़ाई से, कमज़ोर रहे ना कोई, जिसने भलाई सिखा दिया। मैं हूँ लंबे इंतज़ार से जिसने धैर्य सिखा दिया। मैं हूँ ड्रीम अ ड्रीम से जिसने खुद को खुद से सुनना सिखा दिया, प्रोसेस को प्रोसेस करना और  ठहराव (pause) का महत्व अनुभव करा दिया, तुमको मुझको सुनना सिखा दिया। मैं हूँ अभी आभार से उनका  जिन्होंने जीवन समझा दिया! ~luvone CTS 2025