बदलाव की पुकार: 2025 की ओर एक नज़र और मेरी समझ
Change the script 2025 सही मायनों में इसका अर्थ वही गहराई से समझ आया – बदलाव की पुकार। वह बदलाव जिसे हम देखना चाहते हैं , लेकिन उस बदलाव की राह में कुछ लोग पीछे छूट जाते हैं। सवाल यही है – पीछे कौन छूट रहा है ? क्या यह सिस्टम की वजह से है या उन चुनौतियों की वजह से जिन्हें हम लगातार नज़रअंदाज़ करते आ रहे हैं ? युवाओं की कहानियों से निकले नैरेटिव:- युवाओं की कहानियों से ऐसे नैरेटिव सामने आए जिन्हें हमें पूरी तरह से समझना , सोचना और दोबारा बुनना होगा। क्योंकि इन्हीं नैरेटिव्स की वजह से कई लोग पीछे रह जाते हैं। कुछ नैरेटिव्स मेरे मन में लगातार गूंजते रहे: देर से पहुँचने पर मेरे बारे में क्या जजमेंट बनेगा ? अंग्रेज़ी न जानना क्या मेरे करियर को असफल बना देगा ? अलग होना दूसरों से मेरे लिए क्या चुनौतियाँ और विपत्तियाँ लेकर आता है ? औसत होना क्या एक विशेषाधिकार है या एक कठिनाई ? धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक होना , एक thriving life जीने में मेरे लिए कितनी मुश्किलें पैदा कर सकता है ? परीक्षा का होना किस आधार पर तय है , और यह मे...