क्योंकि दिखना है, है दिखाना भी,
आज-कल काम कम, कॉले ज्यादा हो रही है।
नई तस्वीरों संग,पुरानी तस्वीरे भी साझा हो रही ।
काम करना क्या है? मालूम नही किसी को,
इसलिए सोशल मीडिया पर कल्पनाएं साझा हो रही ।
बदल कौन रहा? कौन जाने?
इंसानियत भी अब अनजानी हो रही ।
बदलाव क्या होता है? कौन माने?
बस बदलाव की झूठी कहानिया साझा हो रही।
सच है क्या?
झूठो की प्रशंसा अब सच्ची हो रही,
झूठ है क्या?
सच्चो की जुबां खामोश हो रही।
झूठ बदल रहा,
बदल रहा सच भी,
कल्पनाएं बदल रही,
बदल रही हकीकत भी
इंसान बदल रहा,
बदल रही इंसानियत भी।
क्योंकि दिखना है, है दिखाना भी,
हम ऑफलाइन खुश है, और खुश है डिजिटल दुनिया मे भी।
लव-वन
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