वों पिता है हमे जीवन जीना सिखाता है
तुम आओ इस दुनिया में उससे पहले,
वो तुम्हारे लिए कई सपने संजो जाता है,
डर डर कर उठाता है पहली बार तुम्हे,
अगले ही पल खुशी में
तुम्हे आसमान में उछाल जाता है,
वो एक इंसान है,
पहली बार एहसास पिता का पाता है।
बचपन में जिन खिलौने से खेल न पाया वो,
तुम्हारे लिए वही खिलौने लेकर आता है,
देख खेलते तुम्हे उनसे
खुद भी खिल - खिला जाता है,
पहला कदम तुम्हारा बढ़ता देख वो,
गले से लगकर
अपने आंसू छलका जाता है,
वो एक इंसान है,
बस धर्म पिता का निभाता है।
वो मंजिल नही
केवल राह बताता है,
बढ़ो तुम आगे
वो पीछे से हौसला बढ़ाता है,
अडिग रहो तुम
वो कठिनाइयों से लड़ना सिखाता है,
तभी तो अपने प्रेम में
वो भय दर्शाता है,
वो भी एक इंसान है,
बस धर्म पिता का निभाता है।
तुम्हारी हर तरीकी पर,
कंधो पर तुम्हारे
खामोशी से हाथ रख जाता है,
नाज है, उसे तुम्हारे फैसलों पर,
खुश भी है लेकिन वों,
फिर भी नही बताता है,
वो भी एक इंसान है, बस धर्म पिता का निभाता है।
फासले करने है तय कई तुम्हे,
वो अपनी भारी आवाज में
पल पल याद दिलाता है,
फैसले लेने बड़े बड़े कई तुम्हे
वो पीठ तुम्हारी थप थपा जाता है,
वो एक इंसान है,
बस धर्म पिता का निभाता है।
सपने पूरे होते है उसके,
जब सपने होते है पुरे तेरे,
वही है जो सपनो का सपनो से
रिश्ता समझा जाता है,
हो न कभी उलझन
रिस्तो का मन में तेरे,
न जाने कब वों
रिश्तों की ज़िम्मेदारी सीखा जाता है,
वो एक इंसान है,
बस धर्म पिता है निभाता है।
वही तो है,
जो प्रेम करना सिखाता है,
तेरे बचपन में अपना बचपन
फिर से जी जाता है,
सपनो, रिश्तों और जिम्मेदरियों का
सच्चा एहसास दिलाता है,
हस हस कर जीना,
आंसू छुपाना भी वही तो सिखाता है,
वो एक इंसान है,
बस धर्म पिता का निभाता है।
बंध कर बंधनो में
खुद कैसे जी जाता है,
पर आज़ाद पंखों से
उड़ना तुम्हे सिखाता है,
वो अपने संघर्षों की दास्तां
मुस्कुराकर आसानी से छुपाता है,
तेरे कदमों की धुन पर,
अपने लिखे गीत गुनगुनाता है,
वो अपने आदर्शों के निशान
तेरे संस्कारों पर छोड़ जाता है,
वो पिता है,
बस हमें जीवन जीना सिखाता है।
~luvone 19.06.22
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