एक सपना लिये उड़ चले है हम।
कई सपनों को पूरा करने,
एक सपना लिये उड़ चले है हम।
अंधकार को हराकर,
रोशनी को जीतने चले हम।
ख्वाइशें है अनेको की,
अब कई दिलो की धड़कन है हम।
हमसे बंधी है, उम्मीदें न जाने कितनों की,
अब उनकी उम्मीदों के लिए अपनी ही उम्मीदों लड़ चले हम।
वक़्त ने बदल दी राहे सबकी,
बहके कभी, समझे कभी, रुक का थोड़ा आगे बढ़ चले हम।
जिन राहो में खोए है हम,
उन्ही में उड़ना चाहते है हम,
छूना चाहते है नील गगन,
जैसे छूती है कागज़ की पतंग
डोर का नही है कोई बंधन,
बस उड़ना चाहते है स्वछंद।
उड़ रहे लेकर भीतर कई द्वंद,
जीतेंगे ये अनकही जंग।
कई सपनों को पूरा करने,
एक सपना लिये उड़ चले है हम।
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