एक साथ
मानव शरीर अब रेडियो चैनल सा लग रहा ,
तापमान कहो या चैनल
98.5 से 102.5 तक पकड़ रहा,
न बादशाह न हनी सिंह,
याद आ रहे जगजीत सिंह।
केवल केवल विविध भारती
सुनाई दे रहे गुलशन की शिव आरती।
मोहमद रफ़ी और किशोर दा गा रहे,
राजेश और यूसुफ गीत जिंदगी का गुनगुना रहे।
सरगम और साज सुनाई दे रहे एक साथ।
अब न करें कोई हमसे #मनकीबात
वरना सत्ता परिवर्तन के लिए,
उठेगी आवाज़, उठेंगे अनगनित हाथ।
एक साथ, एक साथ, एक साथ।
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